आज श्री गुरु नानक देव जी का 556वां प्रकाश पर्व है। गुरु नानक देव जी सिखों के पहले गुरु और सिख धर्म के संस्थापक हैं। उनका जन्म 1469 में तलवंडी नामक स्थान पर हुआ था, जिसे अब ननकाना साहिब के नाम से जाना जाता है, जो पाकिस्तान में स्थित है।
गुरु नानक देव जी ने अपना पूरा जीवन मानवता की सेवा और ईश्वर के संदेश को फैलाने में समर्पित कर दिया। उन्होंने एकेश्वरवाद का प्रचार किया, यानी ईश्वर एक है, और सभी मनुष्य समान हैं। उन्होंने जातिवाद, लिंग भेद और सामाजिक असमानताओं का खंडन किया।
गुरु नानक देव जी ने ‘नाम जपो, किरत करो, वंड छको’ का सिद्धांत दिया, जिसका अर्थ है ईश्वर के नाम का जाप करो, ईमानदारी से मेहनत करो और जो कमाओ उसे दूसरों के साथ बांटो। यह सिद्धांत सिख धर्म के मूल में है और आज भी लाखों लोगों को प्रेरित करता है।
उनके उपदेशों को गुरु ग्रंथ साहिब में संकलित किया गया है, जो सिख धर्म का पवित्र ग्रंथ है। गुरु नानक देव जी की यात्राएं, जिन्हें उदासियां कहा जाता है, दूर-दूर तक फैली हुई थीं। उन्होंने भारत, तिब्बत, अरब और मध्य पूर्व के कई हिस्सों की यात्रा की, जहाँ उन्होंने अपने संदेश का प्रचार किया।
गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व दुनिया भर में सिख समुदाय द्वारा बड़े उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जाता है। गुरुद्वारों में विशेष अरदासें, कीर्तन और लंगर का आयोजन किया जाता है। यह दिन हमें गुरु नानक देव जी के सार्वभौमिक प्रेम, समानता और निस्वार्थ सेवा के संदेश को याद दिलाता है।
गुरु नानक देव जी का जीवन और शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं और हमें एक बेहतर समाज बनाने के लिए प्रेरित करती हैं।






